हिमाचल प्रदेश

डॉ. वाईएस परमार के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था

Kavita2
5 Aug 2026 9:48 AM IST
डॉ. वाईएस परमार के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था
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नाहन। हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की जयंती पर मंगलवार को प्रदेशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। राजनीतिक नेताओं, अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने उनके योगदान को याद किया। लेकिन विडंबना यह है कि उनके गृह जिले सिरमौर में उनके नाम पर स्थापित प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान आज कई समस्याओं से जूझ रहा है। नाहन स्थित डॉ. वाईएस परमार गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की कमी और अव्यवस्थाओं को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी है।

मेडिकल कॉलेज में लंबे समय से चल रहे नवीनीकरण कार्य के कारण महिला सर्जिकल वार्ड उपलब्ध नहीं है। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। सर्जरी की जरूरत वाले पुरुष और महिला मरीजों को फिलहाल एक ही वार्ड में रखा जा रहा है। इसके अलावा दोनों के लिए सामान्य शौचालय की व्यवस्था होने से मरीजों की निजता और सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मरीजों और उनके साथ आए लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर महिला और पुरुष मरीजों के लिए अलग-अलग सुविधाएं होना जरूरी है। खासकर सर्जरी के बाद मरीजों को अधिक देखभाल और गोपनीयता की आवश्यकता होती है। ऐसे में एक ही वार्ड में दोनों वर्गों के मरीजों को रखना असुविधाजनक होने के साथ-साथ मरीजों की निजता को भी प्रभावित करता है।

अस्पताल में आने वाले कई लोगों ने बताया कि नवीनीकरण कार्य लंबे समय से चल रहा है, लेकिन इसका समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। मरीजों का कहना है कि स्वास्थ्य संस्थान में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए थीं, लेकिन वर्तमान स्थिति में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

डॉ. वाईएस परमार गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सिरमौर जिले का प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है। यहां न केवल सिरमौर बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्थाओं का सीधा प्रभाव हजारों मरीजों पर पड़ता है। लोगों की उम्मीद रहती है कि मेडिकल कॉलेज स्तर के संस्थान में आधुनिक सुविधाएं, पर्याप्त डॉक्टर और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होगा।

मरीजों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी बनी हुई है। कई विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे स्थानों का रुख करना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की परेशानी बढ़ती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में सुविधाओं का स्तर लगातार बेहतर होना चाहिए, क्योंकि यहां गंभीर और जटिल बीमारियों के मरीज पहुंचते हैं। यदि पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे तो इसका असर उपचार की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।

डॉ. यशवंत सिंह परमार को हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास की नींव रखने वाले नेताओं में गिना जाता है। उनके नाम पर बने संस्थान से लोगों की अपेक्षाएं भी अधिक हैं। ऐसे में उनके गृह जिले में स्थित इस प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान की स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मंगलवार को उनकी जयंती के अवसर पर नेताओं और अधिकारियों ने उनके योगदान को याद किया, लेकिन इसी बीच मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर सामने आई स्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा को भी जन्म दिया है। लोगों का कहना है कि केवल स्मारकों और नामकरण से सम्मान पूरा नहीं होता, बल्कि उनके नाम से जुड़े संस्थानों को बेहतर बनाना भी जरूरी है।

अस्पताल प्रशासन की ओर से नवीनीकरण कार्य और व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। हालांकि मरीजों की समस्याओं को देखते हुए जल्द समाधान की उम्मीद जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जाना चाहिए, ताकि महिला मरीजों के लिए अलग वार्ड और आवश्यक सुविधाएं फिर से उपलब्ध हो सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की गरिमा और निजता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। खासकर महिला मरीजों के लिए अलग व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षित वातावरण किसी भी अस्पताल की मूल आवश्यकता है।

फिलहाल डॉ. वाईएस परमार गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में चल रही अव्यवस्थाएं प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने एक चुनौती के रूप में देखी जा रही हैं। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कदम उठाकर अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों की सुविधाओं में सुधार करेगा, ताकि यह संस्थान अपने नाम और उद्देश्य के अनुरूप बेहतर स्वास्थ्य सेवा केंद्र बन सके।

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